पोलायकला स्थित प्राचीन पांडव कालीन हिमालेश्वर धाम पर मंगलवार को सात दिवसीय भागवत कथा और शिव शक्ति रुद्र यज्ञ का शुभारंभ हुआ। यह आयोजन विगत 35 वर्षों से ग्रामीणों के सहयोग से किया जा रहा है। यज्ञ का शुभारंभ प्रायश्चित कर्म और गणेश पूजन के साथ हुआ। यज्ञ आचार्य पंडित दुर्गा प्रसाद शर्मा के नेतृत्व में यजमानों को प्रायश्चित कर्म करवाया गया, जिसके बाद गणेश पूजन संपन्न हुआ। इसके उपरांत, हिमालेश्वर समिति अध्यक्ष एवं सरपंच रंगलाल दांगी, कोषाध्यक्ष दौलत सिंह दांगी, पोलायकला भाजपा मंडल उपाध्यक्ष डॉ. पदम दांगी सहित अन्य यजमानों और समिति सदस्यों द्वारा भागवत महापुराण की शोभायात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा मंदिर प्रांगण से कथा स्थल तक पहुंची।कथा स्थल पर विधिवत पूजन-अर्चन के बाद भागवताचार्य पंडित ने भक्तों को कथा श्रवण कराते हुए कहा कि सृष्टि में अनंत विभूतियों का जन्म हुआ है। सृष्टि वही है, केवल युग परिवर्तन हुए हैं। जब-जब धरती पर पाप बढ़ता है, तब-तब परमात्मा को धर्म की स्थापना के लिए जन्म लेना पड़ता है।उन्होंने बताया कि आज कलयुग में जिस टेक्नोलॉजी और मशीनरी का उपयोग हो रहा है, वह हमारे धर्म ग्रंथों की देन है। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन और पवित्र ग्रंथ हैं, जिन्हें ऋषि-मुनियों द्वारा प्राप्त दिव्य विज्ञान माना गया है। भागवताचार्य ने वेदों का विस्तृत वर्णन करते हुए कहा कि ऋग्वेद में देवताओं के मंत्र और ज्ञान, यजुर्वेद में यज्ञ और अनुष्ठान की विधि, सामवेद में गीता और संगीत का वर्णन तथा अथर्ववेद में चिकित्सा, मंत्र-तंत्र और दैनिक जीवन की क्रियाएं बताई गई हैं, जिनसे मन और तन दोनों स्वस्थ रहते हैं।उन्होंने जोर दिया कि यदि ब्रह्म को प्राप्त करना है, तो पहले मन और फिर तन को शुद्ध करना होगा, क्योंकि जिसका मन शुद्ध होता है, बांके बिहारी की कृपा भी उसी पर होती है। तुलसीदास जी ने भी रामायण में लिखा है कि निर्मल मन से ही परमात्मा को प्राप्त किया जा सकता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित थे। आयोजकों ने बताया कि शिवरात्रि के अवसर पर विशेष आयोजन किए जाएंगे।