शुजालपुर के पावरग्रिड के सरकारी कबाड़ को गलत तरीके से ठिकाने लगाने के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। इस घोटाले में लापरवाही बरतने के आरोप में उपकेंद्र प्रभारी विजय ओझा को सस्पेंड कर दिया गया है। पावरग्रिड के एमडी सुनील तिवारी के आदेश पर हुई इस कार्रवाई के बाद विजय ओझा का मुख्यालय सिंगरौली तय किया गया है। विभाग का कहना है कि सूचना देने में देरी और लापरवाही की वजह से यह कार्रवाई की गई। विभागीय जांच समिति बनाई जबलपुर मुख्यालय के जनसंपर्क अधिकारी शशिकांत ओझा ने बताया कि इस पूरे मामले की जड़ तक पहुंचने के लिए एक विशेष विभागीय जांच टीम बनाई गई है। यह टीम इस बात की बारीकी से जांच करेगी कि इस खेल में और कौन-कौन से अधिकारी या कर्मचारी शामिल थे। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी और नए तथ्य सामने आएंगे, अन्य दोषियों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने मांगे अहम दस्तावेज इस मामले की जांच कर रही पुलिस ने अब पावरग्रिड के 132 केवी परिसर के सभी सीसीटीवी फुटेज मांग लिए हैं। इसके अलावा, उस दिन ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों की सूची, कबाड़ की वजन सूची और गेटपास के विवरण भी मांगे गए हैं। ऐसा था पूरा मामला यह पूरा मामला 30 जनवरी को तब शुरू हुआ जब पुलिस ने एक कबाड़ी की गाड़ी से पावरग्रिड का सामान पकड़ा था। हालांकि, इस मामले में पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। चर्चा है कि पुलिस ने दो दिन तक इस मामले को दबाकर रखा और कुछ पुलिसकर्मियों के लेनदेन के ऑडियो भी वायरल हुए थे। एफआईआर में कबाड़ के वजन को कम दिखाने के लिए भी हेराफेरी के आरोप लगे हैं। फिलहाल, कार्यपालन अभियंता अरुण कुमार की शिकायत के बाद पुलिस इस पूरे उलझे हुए मामले की खुद जांच कर रही है।