शुजालपुर। जब संकल्प में शक्ति हो और नेतृत्व युवाओं के हाथों में हो, तब इतिहास केवल याद नहीं किया जाता—वह जीवंत होकर सड़कों पर उतर आता है। ऐसा ही प्रेरणादायी दृश्य शुक्रवार को शुजालपुर में देखने को मिला, जब परमार समाज के युवाओं की अथक मेहनत, संगठन और समर्पण से सम्राट श्री राजा भोज जयंती का आयोजन अभूतपूर्व सफलता के साथ संपन्न हुआ। इस भव्य आयोजन की पूरी कमान समाज के ऊर्जावान युवाओं के हाथों में रही। योजना से लेकर क्रियान्वयन तक, अनुशासन से लेकर उत्साह तक—हर मोर्चे पर युवाओं की सक्रिय भूमिका ने यह सिद्ध कर दिया कि जब युवाशक्ति आगे आती है, तो सफलता स्वयं कदम चूमती है। युवाओं की सोच, युवाओं का आयोजन, युवाओं की ऐतिहासिक सफलता युवाओं द्वारा आयोजित भव्य वाहन रैली किशन दीप गार्डन से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई जटाशंकर महादेव मंदिर परिसर पहुंची। रैली में गूंजते “जय सम्राट राजा भोज” और “जय परमार समाज” के नारे युवाओं के आत्मविश्वास, एकता और संगठन शक्ति के सजीव प्रमाण बने। नगरवासियों ने जगह-जगह रैली का स्वागत किया। अनुशासित व्यवस्था, सुनियोजित मार्ग, समयबद्ध संचालन—हर पहलू में युवाओं की दूरदृष्टि स्पष्ट दिखाई दी। यह आयोजन नहीं, बल्कि युवाओं की नेतृत्व क्षमता का सार्वजनिक प्रदर्शन था। राजा भोज के आदर्शों को युवाओं ने बनाया वर्तमान वक्ताओं ने कहा कि सम्राट राजा भोज ज्ञान, न्याय और सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक थे। आज के युवाओं ने उनके विचारों को केवल मंच से नहीं, बल्कि कर्म से साकार किया है। यह कार्यक्रम यह संदेश देता है कि परमार समाज का भविष्य सुरक्षित हाथों में है—ऐसे हाथों में, जिनमें ऊर्जा भी है, समझ भी है और समाज के प्रति जिम्मेदारी भी है। पूजन, प्रेरणा और प्रतिबद्धता जटाशंकर महादेव मंदिर में मां सरस्वती (वाग्देवी) की विधिवत पूजा-अर्चना कर युवाओं ने बौद्धिक समृद्धि और समाजहित का संकल्प लिया। सम्राट राजा भोज के चित्र पर माल्यार्पण कर उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संदेश दिया गया। मंच संचालन पं. सागर जी शास्त्री द्वारा किया गया, जिन्होंने युवाओं की भूमिका की खुले मंच से सराहना करते हुए कहा कि “ऐसे जागरूक और संगठित युवा ही समाज और राष्ट्र का भविष्य गढ़ते हैं।” युवाशक्ति बनी समाज की सबसे बड़ी ताकत कार्यक्रम के समापन पर यह स्पष्ट संदेश उभरकर सामने आया कि इस आयोजन की सफलता का श्रेय समाज के युवाओं को जाता है। उनकी मेहनत, एकजुटता और सकारात्मक सोच ने यह साबित कर दिया कि परमार समाज की धड़कन आज युवाओं में बसती है।