शुजालपुर जवाहरलाल नेहरू स्मृति शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शनिवार को आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ और पीएम उषा योजना के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का विषय भारतीय ज्ञान परंपरा और बौद्धिक पुनर्जागरण, पर्यावरण, सामाजिक और आर्थिक नीतियों का पुनरावलोकन रहा। सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा, तकनीकी और आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार उपस्थित रहे। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय सभ्यता शुभ-लाभ जैसे मूल्यों पर आधारित रही है। यहां व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामूहिक कल्याण को महत्व दिया गया है। उन्होंने कोरोना काल में भारत द्वारा मानवता के हित में किए गए प्रयासों और वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को भारतीय दर्शन का जीवंत उदाहरण बताया। विश्वास, पर्यावरण और ज्ञान भारतीय ज्ञान परंपरा की पहचान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, नदियों और वृक्षों के प्रति सम्मान, नवीकरणीय ऊर्जा, देशी गाय के महत्व और प्राचीन भारतीय विज्ञान, चिकित्सा और शिक्षा परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि आज आवश्यकता है कि भारतीय दर्शन के आधार पर शिक्षा और नीति निर्माण किया जाए। विषय प्रवर्तक डॉ. मुकेश मिश्रा ने कहा कि विश्वास, पर्यावरण और ज्ञान भारतीय ज्ञान परंपरा की पहचान हैं। वहीं डॉ. सत्येंद्र कुमार मिश्रा ने भारतीय ज्ञान परंपरा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति और विकसित भारत की अवधारणा पर व्याख्यान दिया।