संवाददाता प्रवीण जोशी शुजालपुर। शुजालपुर में एमपी पावर ट्रांसमिशन कंपनी के सरकारी कबाड़ की अवैध बिक्री का मामला सामने आया है। 6 लोगों पर एफआईआर के बाद कबाड़ी ने ऑडियो-वीडियो सार्वजनिक कर पुलिस और बिजली कंपनी अफसरों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि सरकारी सामग्री जुगाड़ से बेचने की पूरी प्रक्रिया सामने आने के बावजूद पुलिस ने रुपए देकर माल खरीदने वाले कबाड़ी, वाहन चालक और उसके सहयोगियों पर ही मामला दर्ज कर लिया, जबकि जिन अफसरों की बातचीत, मौजूदगी और कथित सहमति के प्रमाण सामने आए हैं, उनकी भूमिका की जांच तक नहीं की गई। पूरा मामला 30 जनवरी से शुरू होता है। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार इसी दिन 132 केवी उपकेंद्र से सामग्री 220 केवी ग्रिड शुजालपुर के लिए भेजी गई। यह सामग्री सरकारी थी, जिसे नियम के अनुसार विभागीय या अनुबंधित वाहन से ले जाया जाना था, लेकिन इसे एक निजी कबाड़ी की गाड़ी में लोड कर दिया गया। पुलिस थाना शुजालपुर सिटी से हेड मुहर्रिर योगेंद्र ने 30 जनवरी को ही वाहन क्रमांक एमपी 09 एलआर 1990 को खड़ा करवा दिया। गाड़ी पुलिस की निगरानी में रही, लेकिन तब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसी दिन दोपहर करीब 1 बजे का एक ऑडियो सामने आया है, जिसमें 220 केवी उपकेंद्र प्रभारी विजय ओझा और कबाड़ खरीदने वाले शकील के बीच बातचीत रिकॉर्ड होने का दावा है। बातचीत में कबाड़ी अपनी लोकेशन अकोदिया नाका स्थित होटल बताता है। इसके बाद विजय ओझा उसी कबाड़ी की कार में बैठकर होटल पहुंचते हैं। होटल के सीसीटीवी वीडियो भी सामने आने की बात कही जा रही है, जिसमें अधिकारी होटल में बैठकर बातचीत करते नजर आते हैं। वीडियो में जावेद नाम का व्यक्ति नोट गिनते हुए दिखाई देता है, जो कबाड़ खरीदने-बेचने के काम से जुड़ा बताया जा रहा है। ऑडियो में कबाड़ी बताता है कि पुलिस थाने में बात हो चुकी है, गाड़ी ढंकी हुई हालत में जवान के कमरे में खड़ी है और किसी को भनक नहीं लगने दी गई। अधिकारी अगले दिन मामला “सेटल” करने और गाड़ी छुड़ाने की बात करते सुनाई देते हैं। बातचीत में ड्राइवर, वीडियो बनाने और उसे डिलीट कराने तक का जिक्र है। 31 जनवरी को दूसरा ऑडियो सामने आता है। इसमें कबाड़ी कहता है कि डीई साहब रिपोर्ट करने गए थे, जिसके चलते गाड़ी नहीं छूट पाई। जवाब में अधिकारी यह कहते सुनाई देते हैं कि उन्होंने समझाकर उन्हें मना कर दिया है और एक फरवरी को मामला सुलझ जाएगा, गाड़ी छोड़ दी जाएगी। बातचीत में यह भी कहा गया कि पुलिस के एक दीवान ने समझाया कि ज्यादा उलझोगे तो दिक्कत होगी। पहले से पकड़ी गाड़ी को बताया FIR में जब्त इसी बीच 1 फरवरी की सुबह करीब 7:45 बजे अचानक एफआईआर की प्रक्रिया शुरू होती है। शिकायतकर्ता पुलिस को बताता है कि बिजली कंपनी की सामग्री अवैध रूप से ले जाई जा रही थी। यह शिकायत तब की जाती है, जब कंपनी के एसी योगेश माथुर अरुण कुमार को जानकारी देते हैं कि पुलिस ने कंपनी की सामग्री वाहन सहित कबाड़ी के यहां से जब्त की है। यानी जिस गाड़ी को पुलिस पहले से खड़ा करवा चुकी थी, उसी मामले में दो दिन बार औपचारिक शिकायत और एफआईआर दर्ज होती है। कबाड़ की कीमत में अंतर एफआईआर के अनुसार पुलिस ने वाहन से बिजली कंपनी की कबाड़ सामग्री जब्त की। जब्त सामान में इंसुलेटर रॉड, एंगल, बैटरी सहित अन्य उपकरण बताए गए हैं। कुल वजन करीब 242 किलो और कीमत लगभग 70 हजार रुपए दर्शाई गई है। इस प्रकरण में कबाड़ खरीदने वाले, वाहन चालक और सहयोगियों को आरोपी बनाया गया। कबाड़ खरीदने वाले जावेद का आरोप है कि उसने 1 लाख 22 हजार 500 रुपए देकर यह सामग्री खरीदी थी। उसका कहना है कि पुलिस ने अधिकारियों से सांठगांठ कर उसके खिलाफ मामला दर्ज किया और जिन अफसरों ने सामान बेचा या भेजवाया, उन्हीं को फरियादी बनाकर बाहर कर दिया गया। पुलिस की ओर से एसडीओपी निमिष देशमुख का कहना है कि जांच के बाद सरकारी सामान कबाड़ी के वाहन से जब्त कर प्रकरण दर्ज किया गया है। अधिकारी का ऑडियो-वीडियो में होने से इनकार 220 केवी उपकेंद्र प्रभारी विजय ओझा ने सफाई दी कि सामान बीच में डंप कर लिया गया था, पुलिस ने पकड़ लिया। निजी गाड़ी से सामान भेजने के सवाल पर कहा कि उन्हें किसी ने नंबर दिया था, इसलिए वही गाड़ी बुलाई गई। ऑडियो और वीडियो को लेकर उन्होंने इससे इनकार किया। 30 जनवरी का पहला ऑडियो मामले में 220 केवी उपकेंद्र प्रभारी विजय ओझा और कबाड़ खरीदने वाले शकील के बीच 30 जनवरी दोपहर करीब 1 बजे सामान बाहर निकालने से पहले की बातचीत का ऑडियो सामने आया है। ऑडियो में बातचीत- अधिकारी: कहां खड़े हो कबाड़ी: होटल पर अकोदिया नाका पर अधिकारी: और कोई तो नहीं है साथ कबाड़ी: नहीं, अकेला हूं अधिकारी: ठीक है इसके बाद अधिकारी विजय ओझा कबाड़ी की कार में बैठकर अकोदिया रोड स्थित होटल पहुंचे। होटल के सीसीटीवी फुटेज सामने आने का दावा है, जिसमें अधिकारी होटल में बैठकर बातचीत करते और जावेद नाम का व्यक्ति नोट गिनते हुए दिखाई देता है। दूसरा ऑडियो: जब पुलिस ने गाड़ी पकड़ी बातचीत- कबाड़ी: सर नमस्कार अधिकारी: नमस्ते। कबाड़ी: अभी एमपीईबी वाले थाने पर गए थे। अधिकारी: चलो, मैं कल आ रहा हूं, कल मामला शांत करना है अपन को, मैंने बात कर ली है, कल अपन सेटल कर लेंगे मामला, अभी गाड़ी छूटी तो नहीं। कबाड़ी: पुलिस जवान योगेंद्र बना साहब ने किसी को बताई नहीं है गाड़ी, जवान ने अपने कमरे पर रखी है गाड़ी, ढंकी हुई है, आपके ड्राइवर की मुखबिरी है। अधिकारी: कौन ड्राइवर है, हरामखोर है। कबाड़ी: हमको पुलिस ने सब बताया, मनोज, राधेश्याम, एक लंबा काला है, जिसने पूरी वीडियो बनाई थी। अधिकारी: मनोज तो कोई नहीं, राधेश्याम तो है, वो वीडियो उसने डिलीट कर दी थी, मेरी बात हुई थी सुबह। 31 जनवरी का तीसरा ऑडियो तीसरा ऑडियो 31 जनवरी का बताया जा रहा है। बातचीत- कबाड़ी: वो डीई साहब ही तो गए थे, रिपोर्ट करने, वो क्यों कर रहे। अधिकारी: मैंने उनको मना कर दिया समझाकर। कबाड़ी: उनके चक्कर में गाड़ी नहीं छूटी, सुबह 8 बजे छोड़ रहे थे। अधिकारी: चलो अब, कल छूट जाएगी, कल मामला सेटल कर लेंगे। कबाड़ी: दीवान जी पुलिस वाले ने उनको समझाया, आप सब उलझोगे, तब गए। अधिकारी: हां, वो वापस आ गए, मैं कल आ जाऊंगा, फिर सब करते हैं।