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संपादक
भोजराज सिंह पंवार
ब्रेकिंग न्यूज
बुधनी टाइम्स

जिला अस्पताल में केवल 3 शिशु राेग विशेषज्ञ:

जिला अस्पताल डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। उस पर कोरोना संकट ने पूर्व में ऐसी तबाही मचाई कि आमजन सहित सरकार और प्रशासन स्वास्थ्य के प्रति चिंतित है। अब कोरोना की तीसरी लहर का प्रभाव बच्चों पर ज्यादा होने की खबरों ने हर व्यक्ति की चिंता को और ज्यादा बढ़ा दिया। उस पर जिले की वर्तमान जनसंख्या के मुताबिक बच्चों की आबादी 2.47 लाख से अधिक है और जिला अस्पताल शाजापुर में बच्चों का इलाज करने वाले केवल 3 शिशु रोग विशेषज्ञ हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक बच्चों की 1 हजार जनसंख्या पर 1 शिशु राेग विशेषज्ञ होना चाहिए। साल 2011 की जनगणना के मुताबिक जिले की जनसंख्या 15 लाख 12 हजार 353 है, जबकि जिला सांख्यिकी विभाग के अनुसार 10 साल में जिले की जनसंख्या बढ़कर अनुमानित 17 लाख 70 हजार 442 हो चुकी है। इसमें बच्चों की जनसंख्या 14.40 प्रतिशत है यानी 2.47 लाख शून्य से 14 साल तक के बच्चों की आबादी है। जनसंख्या और डब्ल्यूएचओ के मानकों के मुताबिक जिले में 250 शिशु रोग विशेषज्ञ होना चाहिए। बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति यह सरकार की उदासीनता है या मजबूरी यह तो कहना मुश्किल है, क्योंकि केवल शाजापुर नहीं अपितु प्रदेश सहित देशभर में डॉक्टरों की कमी की बात सामने आई है। ऐसे हालातों को देखते हुए जिला अस्पताल में पदस्थ शिशु रोग विशेषज्ञ तीनों डॉक्टरों से बात करने पर उनका जज्बा सामने आया। डॉक्टरों का कहना है कि पिछले दो महीने से वायरल फीवर और डेंगू जैसी बीमारियों के प्रकोप से बच्चे ज्यादा प्रभावित हैं। बच्चों के बिगड़ते स्वास्थ्य के मद्देनजर इन दिनों शिशु रोग विशेषज्ञ 10 से 12 घंटे तक काम कर रहे हैं। डॉक्टरों का जज्बा इसके बावजूद बरकरार है। तीनों ही डॉक्टरों से बात करने पर उन्होंने कहा- यदि तीसरी लहर आई भी तो डटकर मुकाबला करेंगे और बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए दिन-रात भी जुटना पड़ा तो पीछे नहीं हटेंगे, लेकिन देश के भविष्य हमारे नौनिहालों को स्वास्थ्य सेवा का पूरा लाभ मिलेगा।

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